नालंदा विश्वविद्यालय के पुनर्निर्माण एवं नए कैम्पस के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उद्घाटन के साथ ही साथसोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड देखने को मिला की नालंदा को मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने नहीं बल्कि ब्राह्मणों ने तोड़ा था. इसके पक्ष में सोशल मीडिया के इन्फ्लूएन्सर्स ने एक कहानी बताई कि ब्राह्मणों ने सालों यज्ञ करके तांत्रिक एवं मान्त्रिक शक्तियों से नालंदा विश्वविद्यालय को जला दिया, जिसके समर्थन में उन्होंने 16वीं शताब्दी में लिखे लामा तारानाथ की पुस्तक dag bsam lion bang या History of Buddhism in India का संदर्भ दिया. इस मुद्दे पर सोशल मीडिया और समाज में दो पक्ष बनते दिखे.जिसमें पहला पूर्वस्थापित तथ्य से सहमत था कि नालंदा को मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने जलाया था एवं दूसरा पक्ष जिसका पूर्व में वर्णन हुआ है.यूँ तो विभिन्न धर्मों जैसे बौद्ध,इस्लाम, हिन्दू एवं विभिन्न शासकों में सत्ता या धार्मिक आस्था के युद्ध आम बातें थी जो आज तक अनवरत जारी है परन्तु बिंदु को नालंदा के विनाश पर केन्द्रित करते हुए हमने लामा तारणनाथ के पुस्तक के नाम पर किये जा रहे इस दावे की पड़ताल की एवं नालंदा के इतिहास को जानने का प्रयास किया.
किवदंतियों और कथाओं के अतिरिक्त यथार्थ के धरातल पर दस्तावेजी साक्ष्यों का सन्दर्भ देखें तो हम पाते हैं कि-
मध्यकाल के इतिहासकारों की बात करें तो
1. मिन्हाज-ए-सिराज एक प्रसिद्ध मुस्लिम इतिहासकार थे जिन्होंने अपनी पुस्तक "तबक़ात-ए-नासिरी" में नालन्दा विश्वविद्यालय के विध्वंस का उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा है कि कैसे बख्तियार खिलजी ने बिहार पर आक्रमण किया और नालन्दा के पुस्तकालयों को जला दिया।
2. अलाउद्दीन बनारसी की पुस्तक वह्म-ए-उलूम जो बख्तियार खि
लजी के जीवन और अभियानों के बारे में बताती है, जिसमें नालन्दा विश्वविद्यालय का विनाश भी शामिल है।3. अब्दुल कादिर बिन मलिक शम्स-उद-दीन मुहम्मद उर्फ़ फिरिश्ता ने अपनी पुस्तक में बख्तियार खिलजी के अभियानों का उल्लेख किया है, जिसमें नालन्दा विश्वविद्यालय का विनाश भी शामिल है।
इन पुस्तकों और इतिहासकारों के विवरण से यह स्पष्ट होता है कि नालन्दा विश्वविद्यालय का विध्वंस बख्तियार खिलजी द्वारा हुआ था।
आधुनिक इतिहासकारों की बात करें तो,
सतीश चंद्र द्वारा लिखित History of Medieval India, उपिंदर सिंह की A History of Ancient and Early Medieval India: From the Stone Age to the 12th Century ए. ए. रिज़वी की The Wonder That Was India, Volume II, एस दत्त की Buddhist Monks and Monasteries of India: Their History and Their Contribution to Indian Culture,ए एस अल्तेकर की Education in Ancient India, इरफ़ान हबीब की Medieval India: From Sultanat to the Mughals-Delhi Sultanat (1206-1526) Part One, B. N. Luniya की History of Education in India में नालंदा विश्वविद्यालय के विनाश में बख्तियार खिलजी की भूमिका का उल्लेख मिलता है। इन लेखकों में कुछ ऐसे लेखक भी शामिल हैं जिन्होंने औरंगजेब और बाबर जैसा आक्रान्ता का भी अपने लेखों पुस्तकों में बचाव किया है मगर वो बख्तियार खिलजी के नालंदा जलाने की भूमिका से इनकार नहीं कर पाए .
यदि पाश्चात्य लेखकों के सन्दर्भों की बात करें तो
1 Charles Eliot की पुस्तक "Hinduism and Buddhism: An Historical Sketch"
2 H.G. Wells की पुस्तक "The Outline of History"
3 Will Durant की पुस्तक "Our Oriental Heritage" (The Story of Civilization, Volume I)
4 Vincent A. Smith की पुस्तक "The Oxford History of India"
5 James Fergussonकी पुस्तक "History of Indian and Eastern Architecture"
6 A.L. Basham की पुस्तक "The Wonder That Was India"
7 Thomas E. Donaldson की पुस्तक "Iconography of the Buddhist Sculpture of Orissa" में नालंदा के बख्तियार खिलजी द्वारा विनाश का स्पष्ट उल्लेख मिलता है...
इस प्रकार अब तक के ज्ञात इतिहास और समसामयिक पुस्तकों के आधार पर हम कह सकते हैं की नालंदा का विनाश इस्लामिक आक्रान्ता मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी द्वारा किया गया है,इसको ब्राह्मणों ने जलाया इस बरमक दावे हेतु इतिहास में कोई तथ्य नहीं है.

इस लेख के अंत
में अफगानिस्तान के बामियान की बुद्ध प्रतिमाओं का जिक्र करना चाहूँगा जिसे इस्लाम
को मानने वाले तालिबान ने सन 2001 में तोप से उडवा दिया था एवं अपने देश में
बुद्ध प्रतिमा होने के पाप के प्राश्चित स्वरूप 100 गायों
की कुर्बानी दी. यह तथ्य जानना इसलिए भी जरूरी है कि आज के कुछ साल बाद कोई
मूर्खों का सरदार ये न कह सके कि अफगानिस्तान की विश्व प्रसिद्द बुद्ध प्रतिमा को 21 शताब्दी
में आरएसएस या बीजेपी के ब्राह्मण सदस्यों या नेताओं ने गिरवा दिया था...


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